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पत्रकारिता की मूल आत्मा है आंचलिक पत्रकारिता : जयराम शुक्ल

पत्रकारिता की मूल आत्मा है आंचलिक पत्रकारिता : जयराम शुक्ल
पत्रकारिता की मूल आत्मा है आंचलिक पत्रकारिता : जयराम शुक्ल

सतना में मीडिया संवाद कार्यक्रम सम्पन्न
सतना- जनसंपर्क संचालनालय के निर्देशानुसार जिले मे कार्यरत पत्रकारो को पत्रकारिता की विधा, कौशल नवीन तकनीक और संविधान मे उल्लेखित प्रेस से जुडे कानूनो से परिचित कराने के उद्देश्य से सतना के विन्ध्य चेम्बर्स आफ कामर्स भवन के सभाकक्ष मे शनिवार को मीडिया संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मीडिया संवाद कार्यक्रम में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के रीवा परिसर के डायरेक्टर और वरिष्ठ पत्रकार भोपाल जयराम शुक्ल ने कहा कि भारत की पत्रकारिता की मूल आत्मा आंचलिक पत्रकारिता मे ही बसती है। देश में पत्रकारिता और पत्रकार को सही ढंग से परिभाषित किये जाने के जरूरत है। उन्होने कहा कि मेट्रो और महानगरो की पत्रकारिता और अन्य क्षेत्रो की पत्रकारिता मे अत्यधिक अंतर है। ट्विटर और वाट्स अप के कमेन्ट सूचना संवाहक के माध्यम हो सकते है लेकिन इन्हे पत्रकारिता के दायरे मे नही रखा जा सकता। विषय की समझ पत्रकार को आम आदमी से अलग करती है। सोशल मीडिया मे मिलने वाली अधिकांश खबरो की सत्यता संदिग्ध होने से समाज मे उतनी विश्वसनीय नही होती है। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया मे खबरो की विश्वसनियता, प्रमाणिकता, तथ्यपरक और सैद्धांतिक संतुलन होने से उनका अस्तित्व बरकरार है।
रीवा के वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर तिवारी ने कहा कि पत्रकार जनता के संवाद के संवाहक होते है। उन्हे जज की भूमिका नही निभानी चाहिये। जनता की भावना को जागृत कर सार्वजनिक करना चाहिये तथा समाज और शासन के दोष को निर्भीकता से उजागर करना चाहिये। पत्रकार को निर्णय करने का अधिकार नही है बल्कि उसे सूचनाओ को सत्य और तथ्यपरक रूप से उजागर करना है। संविधान मे भले ही चौथे स्तंभ के रूप मे पत्रकारिता का उल्लेख नही हो किंतु मौलिक अधिकारो के तहत पत्रकारिता जनता की बहुत बडी ताकत है। उन्होने कहा कि पत्रकार सामाजिक दायित्वो के तहत शासकीय योजनाओ को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करे। नवभारत के संपादक संजय पयासी ने कहा कि पत्रकारिता को दिशा देने का कार्य इस देश मे आंचलिक पत्रकारिता ने ही किया है। मध्यप्रदेश की पत्रकारिता को भले ही सौ साल पूरे नही हुये हो लेकिन विन्ध्य क्षेत्र की पत्रकारिता ने सौ से भी अधिक वर्ष पूरे कर लिये है। विन्ध्य क्षेत्र की पत्रकारिता के लिये यह गौरव का विषय है। उन्होने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में समाचार को पकडने और उसे समझने की शक्ति होनी चाहिये। आने वाली पीढी को दिशाहीनता की ओर जाने से रोकना भी पत्रकारिता का नैतिक दायित्व है। समाज के लिये दिशा तय करने मे पत्रकारिता की भूमिका महत्वपूर्ण है उन्होने कहा कि हर क्षेत्र मे नैतिक मूल्यो का पतन हुआ है पत्रकारिता भी इससे अछूता नही है। संभव है कि नैतिक मूल्यो के पतन से ही पत्रकारिता चौथे स्तंभ का वास्तविक सम्मान हासिल नही कर पाई हो।
वरिष्ठ पत्रकार श्रीकुमार कपूर ने कहा कि समाज की चिंता रखने वाले पत्रकार जगत को भी अपने अधिकार और अपने कल्याण की चिंता रखनी चाहिये। उन्होने पत्रकारिता के मूल्यो को बनाये रखने वाले समाचार पत्रो और पत्रकारो की सराहना की। मीडिया संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गणेश की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्जलन कर किया गया। स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य के बारे मे जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह ने प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सुब्यवस्थित संचालन सामाजिक न्याय विभाग के के.के.शुक्ला ने किया। इस अवसर पर जिले के समस्त प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार, जनसंपर्क विभाग के एल.पी.करोसिया, राजबिहारी पटेल, राजकुमार सिंह, गोमती प्रसाद अहिरवार भी उपस्थित थे।

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